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विभिन्न मार्गो के विद्युतीकरण के प्रस्तावों को हरी झंडी मिल रही

नागपुर. दस साल से भी ज्यादा अर्से से विद्युतीकरण की आस में बिछे रेलमार्गो की हसरत पूरी होने वाली है। विभिन्न मार्गो के विद्युतीकरण के प्रस्तावों को हरी झंडी मिल रही है।
जाहिर है बिजली मिलने पर इलेक्ट्रिक लोको इन रास्तों पर दौड़ाए जाएंगे और पहले से घट चुके डीजल इंजन लगभग बिछड़ जाएंगे। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मध्य रेल मंडल में अब लगभग 15 डीजल लोको रह गए हैं, जबकि इलेक्टिक लोको 100 से अधिक हैं।
दपुम रेल मंडल पर यही आंकड़ा क्रमश: 13 व 45 है। वक्त की मांग रफ्तार और पैसों की बचत है जो इलेक्ट्रिल लोको ही पुरा कर सकते हैं, डीजल लोको का अस्तित्व सिर्फ इसलिए कायम है क्योंकि कई रेलखंडों पर विद्युतीकरण नहीं है।
डीजल लोको और इलेक्ट्रिक लोको की ताकत में दोगुने से भी अधिक का फर्क है। डीजल लोको को चलाने और सुधारने की लागत अपेक्षाकृत अधिक होती है। जबकि इलेक्ट्रिक लोको कम लागत में दौड़ता सुधरता और ट्रेनों को रफ्तार देता है।
डीजल लोको 1000 जीटी किलोमीटर पर 4.5 लीटर डीजल लेता है, जिसकी कीमत करीब 180 रुपए जबकि इलेक्ट्रिक लोको इतनी ही दूरी पर लगभग 90 रुपए कीमत की 18 यूनिट बिजली का दोहन करता है। मालगाड़ी में डीजल लोको प्रति जीटी किमी 3.2 लीटर (135 रूपए) एवं इलेक्ट्रिक लोको 8 यूनिट बिजली (40 रुपए) लेता है।
स्वीकृति पा चुके विद्युतीकरण के प्रस्ताव
डीजल इंजन को बिदाई देने विभिन्न रेलमार्गो को अब करंट देने की कवायद जारी है। राष्ट्रपति प्रतिभाताई पाटिल के क्षेत्र अमरावती से नरखेड़ के लिए बिछ रही नई लाइन के विद्युतीकरण को स्वीकृति मिल गई है। 120 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के विद्युतीकरण की लागत तैयार की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि अमरावती-नरखेड़ पर इसलिए भी जोर दिया जा रहा है क्योंकि ये लाइन नागपुर का दबाव काफी हद तक कम करेगी। इससे मुंबई से दिल्ली के बीच चलने वाली कई मालगाड़ियां नागपुर को बगैर छुए ही निकल जाएगी।
रेलवे के उच्चधिकारी सूत्रों के अनुसार आमला-छिंदवाड़ा 110 किलोमीटर, डुमरीखुर्द-रामटेक, माजरी-पिंपलकुटी एवं गोंदिया-बल्लारशाह 250 किलोमीटर रेलमार्ग के विद्युतीकरण के प्रस्तावों को भी मंजूरी के बाद लागत का मसौदा तैयार किया जा रहा है।
विद्युतीकरण के अभाव में माजरी-पिंपलकुटी रेलखंड पर आदिलाबाद से आने वाले इलेक्ट्रिक इंजन को बदलकर डीजल इंजन जोड़ा जाता है इसके बाद गाड़ी बल्लारशाह का रूख करती है। गोंदिया-बल्लारशाह मार्ग का भी यही हाल है, दोनों जगहों पर लोको बदलना पड़ता है जिससे यात्री गाड़ियां देरी का दंश झेलती है।
दपुम रेलवे के अंतर्गत 10 वर्ष पूर्व आमान परिवर्तन के बावजूद महज 40 किलोमीटर के गोंदिया-बालाघाट रेलखंड का विद्युतीकरण नहीं हो पाया है। इसके अलावा छिंदवाड़ा-कलमना(नागपुर) आमान परिवर्तन में भी विद्युतीकरण शेष है।
नहीं रहेगा डीजल शेड
चारों ओर रेलमार्ग पर बिजली के इंतजाम के लिए जारी कोशिशें भविष्य में अजनी डीजल लोको शेड की तस्वीर बदल कर रख देगी। डीजल शेड की कुल 4 लाइनों में दो लाइन का इस्तेमाल प्रस्तावित मेमू कार शेड के लिए किया जाना है।
मध्य रेल के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मेमू कार शेड के लिए 20 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। वर्तमान में फेरी पूरी करने पर डीजल लोको की शेड में जांच व आइल आदि भरा जाता है, इसलिए यह मूल रूप से ट्रिप शेड है।
सूत्रों के मुताबिक इसके अलावा शेड की अन्य लाइनों का इलेक्ट्रिक लोको शेड इस्तेमाल कर सकता है। मेमू कार शेड के लिए एक वर्ष में स्वीकृति हासिल होने की प्रबल संभावनाएं जताई जा रही है। इसके आने के बाद विदर्भ के भीतर मुंबई लोकल की तरह गाड़ियां चलाने की राहें मजबूत हो जाएंगी।
जानकारों के मुताबिक मेमू ट्रेनें अन्य मेल एक्सप्रेस ट्रेनों के मुकाबले प्रति जीटी किलोमीटर महज 16 यूनिट ही बिजली की खपत करती है। मेमू कार शेड आने के बाद नागपुर से चलने वाली तकरीबन सभी पैसेंजर ट्रेनों को मेमू कोच के रैक में तब्दील किए जाने की कोशिशें शुरू हो जाएंगी।
Source -  Bhasker

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